Tuesday, April 17, 2012

निरंतर कह रहा .......: नए को जानने से पहले

निरंतर कह रहा .......: नए को जानने से पहले: जिन्हें कल जानता था उनमें से कुछ याद रहे कुछ को भूल गया आज तक नहीं जानता था जिन्हें कल जानूंगा उन्हें कुछ याद रहेंगे कुछ को भूल जाऊंगा कैस...

Friday, April 13, 2012

निरंतर कह रहा .......: अँधेरे में भी रोशनी निरंतर मेरे साथ रहती

निरंतर कह रहा .......: अँधेरे में भी रोशनी निरंतर मेरे साथ रहती: आज भी दिन भर दिमाग में कोई ना कोई उधेड़बुन चलती रही खुद से सवाल किया क्या ज़िन्दगी ऐसे ही चलती रहेगी ? मन की आस फिर भी टूटी नहीं बिस्तर पर ल...

निरंतर कह रहा .......: ज़िन्दगी ने हमें सताया बहुत

निरंतर कह रहा .......: ज़िन्दगी ने हमें सताया बहुत: ज़िन्दगी ने हमें सताया बहुत हँसते हुए को रुलाया बहुत हमने भी उसे छकाया बहुत वो गिराने की कोशिश करती रही   हमें लंगडी लगाती रही हमने भी हा...

निरंतर कह रहा .......: कुछ बातें .........

निरंतर कह रहा .......: कुछ बातें .........: कुछ बातें कुछ यादें सदा अनकही रहती हैं कभी मुस्काराहट कभी क्रोध दिलाती हैं किसी को बताऊँ नहीं बताऊँ की दुविधा में छाया बन कर साथ चलती हैं...

निरंतर कह रहा .......: अच्छे के साथ

निरंतर कह रहा .......: अच्छे के साथ: अच्छे के साथ छात्र के जन्म दिन पर शिक्षक ने गुलाब के फूल की टहनी भेंट की छात्र बोला गुरूजी इसमें कांटे लगे हैं हाथ में चुभेंगे शिक्षक ने ...

Wednesday, April 11, 2012

"निरंतर" की कलम से.....: अच्छे के साथ

"निरंतर" की कलम से.....: अच्छे के साथ: छात्र के  जन्म दिन पर शिक्षक ने गुलाब के फूल की टहनी भेंट की छात्र बोला गुरूजी इसमें कांटे लगे हैं हाथ में चुभेंगे शिक्षक ने उत्तर दिया चि...

Tuesday, April 3, 2012

निरंतर कह रहा .......: बिना अभिमन्यु बने चक्रव्यूह नहीं टूटेगा

निरंतर कह रहा .......: बिना अभिमन्यु बने चक्रव्यूह नहीं टूटेगा: कहीं खो गया हूँ खुद को भूल गया हूँ सब की सोचते सोचते खुद भटक गया हूँ आत्मविश्वास से डिग गया हूँ अनिश्चय के भंवर में गोते लगा रहा हूँ...

निरंतर कह रहा .......: ये कैसी चाहत है ?

निरंतर कह रहा .......: ये कैसी चाहत है ?: तुम कहते हो हमें बहुत चाहते हो हर पल याद करते हो ये कैसी चाहत है ? ये कैसी याद है ? हमारे चेहरे पर दर्द की लकीरें तुम ठहाके लगा रहे हो हम ...

Tuesday, March 20, 2012

निरंतर कह रहा .......: बिना माँ के

निरंतर कह रहा .......: बिना माँ के: साधन संपन्न , धनाढ्य ने कमरे की खिड़की से घनघोर बरसात का आनंद लेते हुए देखा माँ स्वयं भीग रही थी पर पुत्र के सर पर छोटी सी छतरी ताने उसे बरस...

निरंतर कह रहा .......: थोड़ा तुम आगे बढ़ो,थोड़ा मैं आगे बढूँ

निरंतर कह रहा .......: थोड़ा तुम आगे बढ़ो,थोड़ा मैं आगे बढूँ: मैं रात में   देर से सोता तुम कहती लाईट में नींद नहीं होती तुम भरती जोर के खर्राटे नींद मेरी भी उडती तुम पीती चाय ठंडी   मुझे गर्म चाय अच...