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Thursday, April 7, 2011

अनमोल वचन


 
पृथ्वी पर तीन रत्न हैं:
जल, अन्न और सुभाषित
 मूर्ख लोग पत्थर के टुकडों को ही रत्न कहते हैं
संस्कृत सुभाषित
विश्व के सर्वोत्कॄष्ट कथनों और विचारों का 
ज्ञान ही संस्कृति है
मैथ्यू अर्नाल्ड
संसार रूपी कटु-वृक्ष के 
केवल दो फल ही अमृत के समान हैं
पहला, सुभाषितों का रसास्वादन  और दूसरा,
अच्छे लोगों की संगति(सत्संग)
चाणक्य
सही मायने में बुद्धिपूर्ण विचार 
हजारों दिमागों में आते रहे हैं
लेकिन उनको अपना बनाने के लिये हमको ही
उन पर गहराई से तब तक विचार करना चाहिये
जब तक कि वे हमारी अनुभूति में जड न जमा लें
गोथे
मैं उक्तियों से घृणा करता हूँ
वह कहो जो तुम जानते हो
इमर्सन
किसी कम पढे व्यक्ति द्वारा 
सुभाषित पढना उत्तम होगा
सर विंस्टन चर्चिल
बुद्धिमानो की बुद्धिमता और बरसों का अनुभव
सुभाषितों में संग्रह किया जा सकता है
आइजैक डिजरायली
मैं अक्सर खुद को उदृत करता हूँ
इससे मेरे भाषण मसालेदार हो जाते हैं
सुभाषितों की पुस्तक 
कभी पूरी नही हो सकती
-राबर्ट हेमिल्टन
(सुभाषित=सुन्दर ढंग से कही गयी बात)

Monday, April 4, 2011

उद्यम

"उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथै:
नहिं सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः "


कार्य 
उद्यम से ही सिद्ध होते हैं
मनोरथ मात्र से नहीं 
 सोये हुए शेर के मुख में 
मृग प्रवेश नहीं करते
(हितोपदेश)

शक्ति

जो मनुष्य 
अपनी शक्ति के अनुसार 
बोझ लेकर चलता है 
वह किसी भी स्थान पर 
गिरता नहीं है 
और न दुर्गम रास्तों में 
विनष्ट ही होता है
- मृच्छकटिक

बल

मनुष्य 
अपनी दुर्बलता से 
भली-भांति 
परिचित रहता है
पर उसे 
अपने बल से भी
अवगत होना चाहिये
— जयशंकर प्रसाद
 

लगन

लगन  
और 
 योग्यता  
एक साथ मिलें तो
निश्चय ही
एक अद्वितीय  
रचना का  
जन्म होता है
- मुक्ता

संतोष

संतोष का  
वृक्ष कड़वा है  
लेकिन
इस पर लगने वाला 
 फल मीठा होता है
- स्वामी शिवानंद