वो सबसे दुखी जो
निरंतर समझता
खुद को दुखी
जो खुदा ने दिया
उस से तृप्ति नहीं होती
जुबान से सदा खीज
प्रकट होती
संतुष्टि उस से कोसों
दूर रहती
ज़िन्दगी रोते रोते
कटती
17-07-2011
1198-78-07-11
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